एक्सक्लूसिव | शंकर सुब्रमण्यम की सफलता की कहानी: भारतीय बैडमिंटन में नई उम्मीदों की शुरुआत
नई दिल्ली: टूटे सपने, जल्दी खत्म हुए टूर्नामेंट और लगातार निराशाजनक प्रदर्शन – हाल के समय में भारतीय बैडमिंटन के लिए यही कहानी दोहराई जा रही है।
कुछ साल पहले तक जहां भारत लगातार पदक जीत रहा था, वहीं अब यह खेल निराशा का कारण बनता जा रहा है – जबकि देश के पास ओलंपिक रजत पदक विजेता, विश्व चैम्पियन और कई दिग्गज खिलाड़ी हैं।
पेरिस में हुए हालिया BWF वर्ल्ड चैम्पियनशिप ने एक बार फिर यह याद दिलाया। सत्विक्सैराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की ब्रॉन्ज मेडल जीत को छोड़कर (जो और बेहतर हो सकती थी), न तो पीवी सिंधु और न ही लक्ष्य सेन उम्मीदों पर खरे उतर पाए। सिंधु क्वार्टरफाइनल में बाहर हो गईं, जबकि लक्ष्य सेन पहले ही मैच में हारकर लौट आए।
अगर केवल एक टूर्नामेंट को न देखकर बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें, तो साफ है कि भारतीय खिलाड़ी जो कभी वर्ल्ड स्टेज पर छाए रहते थे, उनकी चमक कम हो गई है। वहीं नई पीढ़ी अभी उस खाली जगह को भर नहीं पाई है।
लेकिन इन सबके बीच, पूर्व वर्ल्ड जूनियर नंबर 1 शंकर सुब्रमण्यम उम्मीद की नई किरण लेकर सामने हैं। वह चाहते हैं कि फैन्स अगली पीढ़ी पर भरोसा करें।
उन्होंने TimesofIndia.com से कहा,
“एक ऐसे खिलाड़ी के तौर पर जो वर्ल्ड जूनियर नंबर 1 रह चुका है, मैं मानता हूँ कि भारतीय बैडमिंटन इस समय बहुत ही उम्मीदों से भरे दौर में है। हमारे पास पहले से ही वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी हैं, और नई पीढ़ी भी शानदार क्षमता दिखा रही है।”
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शंकर की अब तक की उपलब्धियाँ
- 2004 में जन्मे शंकर ने अब तक पुरुष सिंगल्स में करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 52 हासिल की है।
- उनका सबसे बड़ा परिणाम मार्च 2024 में स्विस ओपन सुपर 300 में विश्व नंबर 2 एंडर्स एंटोनसन को हराना रहा।
- 2021 में महज 17 साल की उम्र में उन्होंने युगांडा इंटरनेशनल के फाइनल तक पहुंच बनाई।
- 2022 में वर्ल्ड जूनियर चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता।
- 2024 में चोटों और व्यस्त शेड्यूल ने उन्हें पीछे जरूर किया, लेकिन अब वे धीरे-धीरे फॉर्म में वापसी कर रहे हैं।
शंकर ने कहा,
“इस साल मेरे पास ट्रेनिंग का ज्यादा समय रहा है और यह मेरे लिए बड़ी राहत है।”
जीत और खेल के प्रति नज़रिया
एंटोनसन पर मिली जीत उनके लिए खास है, लेकिन वे कहते हैं,
“जीत शानदार थी, लेकिन जश्न मनाने का समय ही नहीं मिला। मैं बस उसी लय को बनाए रखना चाहता था। मेरे लिए रैंकिंग मायने नहीं रखती। मैं हर मैच को एक-एक पॉइंट पर खेलता हूँ और आगे बढ़ता हूँ।”
उन्हें अक्सर डिफेंसिव खिलाड़ी कहा जाता है, लेकिन वह किसी टैग में बंधना नहीं चाहते।
“मेरे लिए यह साबित करने का सवाल नहीं है। मैं वही खेलता हूँ जिसकी मैच में ज़रूरत होती है। अगर आक्रमण करना पड़े, तो मैं आक्रमण करता हूँ,” शंकर ने कहा।
भारतीय बैडमिंटन का भविष्य
भले ही विश्व स्तर पर भारत की पकड़ कुछ कमजोर हुई हो, शंकर आशावादी हैं।
“टॉप लेवल पर लगातार दबदबा बनाने के लिए पहले से काम चल रहा है – बेहतर ग्रासरूट्स प्रोग्राम, हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग की सुविधा, और खिलाड़ियों के आसपास बड़ी सपोर्ट टीम जिसमें स्पोर्ट्स साइंस, साइकोलॉजी और रिकवरी शामिल हो,”
उन्होंने समझाया।
तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले शंकर ने कहा,
“मैं तमिलनाडु बैडमिंटन एसोसिएशन से जुड़ा रहा हूँ और मैंने देखा है कि राज्य स्तर पर बैडमिंटन तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
2028 ओलंपिक पर नज़र
शंकर मानते हैं कि अगर युवा खिलाड़ियों को नियमित और शुरुआती स्तर पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का एक्सपोज़र दिया जाए, तो भारत न सिर्फ कभी-कभी चैंपियन देगा बल्कि हर साल टॉप लेवल पर मजबूती से खड़ा रहेगा।
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भारतीय बैडमिंटन ने भले ही फिलहाल अपनी सुनहरी चमक खो दी हो, लेकिन शंकर सुब्रमण्यम जैसे युवा खिलाड़ी नई ऊर्जा और जुनून से इस खेल को पुनर्जीवित करने में लगे हैं। भविष्य निस्संदेह उज्ज्वल है।



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