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जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी हादसा: बारिश और भूस्खलन से भारी तबाही, 34 की मौत

वैष्णो देवी में दर्दनाक हादसा: मूसलाधार बारिश और लैंडस्लाइड से मचा हाहाकार

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित पवित्र वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर मंगलवार को हुए भूस्खलन में मृतकों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है, जबकि कम से कम 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह हादसा मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे हुआ, जब भारी बारिश के चलते पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया और पत्थर, चट्टानें तथा बोल्डर अचानक यात्रियों पर गिर पड़े।

यात्रा हुई निलंबित

यह हादसा कटरा से वैष्णो देवी भवन तक 12 किलोमीटर लंबे ट्रैक के बीच में हुआ। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार सुबह से ही हिमकोटी मार्ग पर यात्रा रोक दी गई थी, लेकिन पुराने मार्ग से यात्रा दोपहर 1.30 बजे तक जारी रही। इसके बाद बारिश तेज़ होने के कारण उस मार्ग पर भी यात्रा को रोक दिया गया।

बाढ़ और तबाही का आलम

बुधवार को जम्मू क्षेत्र की नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा, लेकिन अनंतनाग और श्रीनगर में झेलम नदी ने बाढ़ का चेतावनी स्तर पार कर लिया और कई रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया। प्रशासन ने लोगों को आश्वासन दिया है कि हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है और घबराने की ज़रूरत नहीं है।

भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई पुल, घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान तबाह हो गए हैं। दूरसंचार सेवाएँ भी करीब 22 घंटे बंद रहने के बाद आंशिक रूप से बहाल की गईं।

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लगातार बारिश और अव्यवस्था

जम्मू-कश्मीर में लगातार चौथे दिन बुधवार को भारी बारिश हुई, जिससे भूस्खलन और फ्लैश फ्लड्स ने व्यापक तबाही मचाई। हज़ारों लोगों को निचले इलाकों से सुरक्षित निकाला गया।

रेल और सड़क परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 18 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं क्योंकि चक्की नदी पर बाढ़ के कारण ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया।

किश्तवाड़ जिले के दूरस्थ मारगी इलाके में एक फ्लैश फ्लड 10 घर और एक पुल बहा ले गया। सौभाग्य से यहाँ किसी की मौत नहीं हुई। वहीं, कठुआ के लखनपुर गांव में अर्धसैनिक बलों के दर्जनभर जवान बाढ़ में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं।

राहत और बचाव कार्य

भारी तबाही के बीच राहत कार्य जारी है। भारतीय वायुसेना का C-130 विमान उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस से राहत सामग्री लेकर जम्मू पहुँचा। इसके अलावा चिनूक और Mi-17 V5 हेलिकॉप्टर जम्मू, उधमपुर, श्रीनगर और पठानकोट में स्टैंडबाय पर रखे गए हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सके।

मुख्यमंत्री का सवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि जब खराब मौसम की चेतावनी पहले से थी तो श्रद्धालुओं को यात्रा जारी रखने की अनुमति क्यों दी गई। उन्होंने कहा:
“जब हमें मौसम की जानकारी पहले से थी, तो क्या हमें यात्रियों को रोकने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कदम नहीं उठाने चाहिए थे? आखिर ये लोग ट्रैक पर क्यों थे?”

 

 

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