अमित शाह का बयान: ‘NDA बिहार में इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी’, विपक्ष पर बड़ा हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘पंचायत आज तक’ कार्यक्रम में बिहार चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) राज्य में अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा। शाह ने अपने बयान में भरोसे और आत्मविश्वास का मिश्रण दिखाया, जो यह संकेत देता है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल — जदयू, हम और एलजेपी (रामविलास) — के बीच सीट बंटवारे और रणनीति को लेकर अंदरूनी तैयारियाँ लगभग तय हो चुकी हैं। अमित शाह का यह दावा सिर्फ चुनावी भाषण नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश था कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA अपने विकास कार्यों और योजनाओं के आधार पर जनता से सीधा संवाद करना चाहता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दस वर्षों में हुए विकास कार्यों — सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और महिला कल्याण — को NDA की सबसे बड़ी ताकत बताया। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह चुनाव जातिगत समीकरणों से आगे बढ़कर “काम बनाम वादों” का होगा, जहाँ जनता यह तय करेगी कि कौन सरकार में स्थिरता, सुरक्षा और विकास ला सकता है।
अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब महिलाओं को कोई फायदा होता है, तो “लालू एंड कंपनी, राहुल एंड कंपनी को तकलीफ क्यों होती है?” उनका यह बयान सीधे तौर पर उन राजनीतिक दलों की आलोचना थी जो उज्ज्वला योजना, हर घर जल मिशन, और शौचालय निर्माण जैसी योजनाओं पर सवाल उठाते हैं। शाह ने कहा कि ये योजनाएँ सिर्फ सरकार की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में क्रांतिकारी कदम हैं, जिनसे ग्रामीण महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष आज भी राजनीति को पुराने जातिगत नजरिए से देखता है, जबकि मोदी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर चल रही है। शाह के अनुसार, यदि गरीब महिला को गैस सिलेंडर, स्वच्छ शौचालय, या घर के भीतर नल से जल मिलता है, तो यह राजनीति नहीं, बल्कि सेवा है — और इसी सेवा भाव ने NDA को जनता के बीच भरोसेमंद विकल्प के रूप में स्थापित किया है। यह बयान न केवल महिलाओं को संबोधित था, बल्कि पूरे ग्रामीण मतदाता वर्ग को यह संदेश देने के लिए था कि केंद्र सरकार की योजनाओं ने समाज के सबसे निचले तबके तक राहत पहुँचाई है।
शाह ने अपने संबोधन में बिहार के मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि चुनाव के बाद NDA के विधायक दल का नेता ही मुख्यमंत्री बनेगा। इस बयान से उन्होंने यह संकेत दिया कि भाजपा और जदयू के बीच नेतृत्व को लेकर कोई मतभेद नहीं है, और चुनाव के बाद सभी सहयोगी दल मिलकर सरकार बनाएंगे। उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि बिहार के विकास में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है, लेकिन अब जनता NDA के सामूहिक नेतृत्व पर भरोसा कर रही है। शाह के इस बयान को एक रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है — एक तरफ उन्होंने सहयोगी दलों को साथ बनाए रखने का आश्वासन दिया, वहीं दूसरी ओर संभावित सत्ता संतुलन के लिए भाजपा को केंद्रीय भूमिका में रखा। यह स्पष्ट था कि शाह का लक्ष्य न केवल विपक्ष को कमजोर दिखाना था, बल्कि NDA के अंदर भी एकता और अनुशासन का संदेश देना था। उन्होंने कहा कि यह चुनाव किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन की कार्यशैली और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर जनमत संग्रह (referendum) है।
कार्यक्रम में अमित शाह का रुख साफ था — वे इस चुनाव को केवल बिहार की सत्ता तक सीमित नहीं देख रहे, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति के एक बड़े समीकरण के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। उनके अनुसार, यह चुनाव इस बात का परीक्षण होगा कि जनता विकास, सुरक्षा और स्थिरता की राजनीति को कितना महत्व देती है। शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की सरकारों ने बिहार में जो परिवर्तन लाए हैं, वे आज विपक्ष की राजनीति को अप्रासंगिक बना रहे हैं। अपराध और भ्रष्टाचार के पुराने दौर की तुलना में आज का बिहार निवेश, शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि विपक्ष की सरकारें सिर्फ “परिवारवाद” और “तुष्टिकरण” की राजनीति करती हैं, जबकि NDA “राष्ट्रहित” को सर्वोच्च मानता है। इस प्रकार, शाह का पूरा वक्तव्य चुनावी रणनीति के साथ-साथ एक वैचारिक घोषणापत्र भी था — जिसमें विकास, सुशासन और महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर बिहार के भविष्य की नई दिशा तय करने की बात कही गई।


