DUSU चुनाव 2025: ABVP की बड़ी जीत, NSUI को सिर्फ एक सीट पर संतोष
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव नतीजे इस बार राजनीति के बड़े सियासी संदेश लेकर आए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), जो बीजेपी से जुड़ी छात्र इकाई है, ने चार में से तीन अहम पदों पर जीत हासिल कर अपना दबदबा कायम किया है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर जीत ने साबित कर दिया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के युवाओं में आज भी राष्ट्रवादी विचारधारा की पकड़ मजबूत है। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़ी छात्र इकाई NSUI को केवल उपाध्यक्ष पद पर ही जीत मिल सकी। चुनावी रुझानों को देखकर साफ होता है कि छात्र राजनीति में भी राष्ट्रीय स्तर की राजनीति का असर गहराई से दिखाई देता है। NSUI के लिए यह नतीजे इसलिए भी झटका माने जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार में खुद को युवाओं की आवाज़ के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी। यहां तक कि प्रचार के दौरान NSUI ने ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ जैसे नारे भी लगाए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें केवल एक पद से ही संतोष करना पड़ा।
ABVP की इस शानदार जीत ने कांग्रेस और उसके नेताओं के हाल के आरोपों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में लगातार यह आरोप लगाया था कि देशभर में वोट चोरी हो रही है और चुनाव आयोग इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा था कि आने वाले महीनों में पूरा देश यह समझ जाएगा कि वोट चोरी की जा रही है और फिर जनता इसका विरोध करेगी। लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र चुनावों में ABVP की भारी जीत को राहुल गांधी के आरोपों पर करारा जवाब माना जा रहा है। NSUI ने भी चुनाव हारने के बाद EVM पर सवाल उठाए और उसमें हेरफेर का आरोप लगाया, लेकिन युवाओं के बीच यह बात ज्यादा असर नहीं छोड़ पाई। छात्रों का मानना है कि यह चुनाव निष्पक्ष ढंग से हुए और ABVP की जीत उनकी मेहनत और विचारधारा का नतीजा है।
इस पूरे चुनाव परिणाम का एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि यहां छात्र राजनीति के जरिए देश की मुख्यधारा की राजनीति की झलक साफ दिखाई दी। अमित शाह ने इस जीत को युवाओं की राष्ट्र प्रथम की विचारधारा में आस्था का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि आज का युवा भारत राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है और यही संदेश दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरे देश तक जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ समय से NSUI अपने कैंपेन में बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही थी, जबकि ABVP ने राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति और युवाओं की भूमिका को अपनी प्राथमिकता बनाया। नतीजों से साफ दिखता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने ABVP के एजेंडे को ज्यादा भरोसेमंद माना। इस चुनाव ने यह भी साबित कर दिया कि सोशल मीडिया प्रचार, जमीनी स्तर पर पहुंच और संगठन की मजबूती आज भी चुनावी सफलता की कुंजी हैं।
छात्र संघ चुनाव को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले बड़े चुनावों में यह नतीजे एक संकेत के तौर पर देखे जाएंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में ABVP की जीत बीजेपी के लिए मनोबल बढ़ाने वाली है, वहीं कांग्रेस और NSUI को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा। खासकर राहुल गांधी के हालिया ‘वोट चोरी’ अभियान को इस हार के बाद एक बड़ा झटका माना जा रहा है। NSUI नेताओं का कहना है कि वे EVM में गड़बड़ी के मुद्दे को आगे ले जाएंगे और इस पर गंभीरता से सवाल उठाएंगे, लेकिन छात्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बार-बार हार के बाद कांग्रेस और उसकी छात्र इकाई को संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। कुल मिलाकर, DUSU चुनाव नतीजों ने जहां ABVP को नई ऊर्जा दी है, वहीं NSUI और कांग्रेस के लिए यह चेतावनी है कि केवल आरोपों और नारों से चुनाव नहीं जीते जाते, बल्कि युवाओं के भरोसे और मेहनत से ही वास्तविक सफलता मिलती है।


