केटीआर का बड़ा हमला: एलएनटी प्रोजेक्ट, 15,000 करोड़ कर्ज और कांग्रेस सरकार पर गंभीर सवाल
बीआरएस वर्किंग प्रेसिडेंट के.टी. रामाराव (KTR) ने हाल ही में एक गंभीर आरोप राज्य सरकार पर लगाते हुए कहा कि एलएनटी प्रोजेक्ट को लेकर सरकार की नीतियां संदिग्ध हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह परियोजना 2070 तक एलएनटी की जिम्मेदारी में थी, तो राज्य सरकार ने आखिरकार 15,000 करोड़ रुपये का निजी कर्ज अपने ऊपर क्यों लिया। यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से राज्य पर अतिरिक्त बोझ डालता है, बल्कि इसके पीछे पारदर्शिता की कमी और संभावित गोलमाल की संभावना को भी जन्म देता है। केटीआर ने कहा कि राज्य सरकार को इस बड़े फैसले के पीछे की प्रक्रिया को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि लोगों को सच्चाई मालूम हो सके। उनकी दलील थी कि कांग्रेस सरकार एक तरफ तो यह कह रही है कि उसके पास कल्याणकारी योजनाओं को चलाने के लिए पैसा नहीं है, वहीं दूसरी ओर इतने बड़े स्तर पर कर्ज लेकर राज्य की आर्थिक स्थिति को और भी खराब कर रही है। यह सवाल इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि 15,000 करोड़ रुपये का यह बोझ आने वाली पीढ़ियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा और इसका असर लंबे समय तक राज्य की वित्तीय नीतियों पर देखने को मिलेगा।
केटीआर ने अपने बयान में बार-बार पारदर्शिता की कमी का जिक्र किया और पूछा कि आखिरकार इस पूरे मामले में गोलमाल की संभावना क्यों नजर आ रही है। उनका कहना था कि अगर यह सौदा पूरी तरह से सही है तो सरकार को इसके सभी दस्तावेज़ और प्रक्रिया सार्वजनिक करने से परहेज़ क्यों है। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस सरकार इस कर्ज को छुपाकर किसी विशेष उद्देश्य या लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि एक बड़ा राजनीतिक सवाल भी बन चुका है। राज्य के लोग यह जानने के हकदार हैं कि इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल कैसे और किसके हित में किया जाएगा। केटीआर ने यह भी कहा कि जिस तरह से यह पूरा मामला सामने आया है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस सरकार ने जल्दबाजी में फैसले लिए हैं और इसमें कहीं न कहीं घोटाले की आशंका साफ झलक रही है। इस तरह के कदम न केवल राज्य की छवि को धूमिल करते हैं, बल्कि निवेशकों और आम जनता का भरोसा भी कमजोर करते हैं।
केटीआर ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और बड़ा मुद्दा उठाया, और वह था फोन टैपिंग का। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने खुलेआम फोन जांचने के लिए टेंडर बुलाए, जो कि नागरिकों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है। केटीआर ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी खुद यहां की कांग्रेस सरकार को देख रहे हैं, तो उन्हें इस पर जवाब देना होगा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह वही स्थिति है जिसे लोग पहले ‘इंदिरम्मा राज’ के नाम से जानते थे, जब आम जनता की निजता और अधिकारों की अनदेखी की जाती थी। उनके अनुसार, आज की कांग्रेस सरकार भी उसी राह पर चल रही है, जहाँ जनता की सुरक्षा और प्राइवेसी से खिलवाड़ किया जा रहा है। केटीआर ने जनता को आगाह किया कि अगर इस प्रकार की नीतियां जारी रहती हैं, तो आने वाले समय में कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगा। इस मुद्दे पर उन्होंने साफ कहा कि यह केवल राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि जनता के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला है।
अपने बयान के अंत में केटीआर ने जुबली हिल्स उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बीआरएस इस उपचुनाव में जीत हासिल करेगी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह हमेशा आखिरी समय में हंगामा खड़ा करने की कोशिश करती है ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके। केटीआर ने दावा किया कि बीआरएस जनता के साथ खड़ी है और उनकी नीतियां पूरी तरह से जनहितकारी हैं। वहीं, कांग्रेस सरकार केवल कर्ज, घोटालों और फिजूल खर्ची की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब सब कुछ समझ चुकी है और उपचुनाव इसका साफ सबूत होगा। केटीआर ने यह भी बताया कि बीआरएस हमेशा से पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विश्वास करती है, जबकि कांग्रेस की राजनीति केवल सत्ता पाने तक सीमित है। जुबली हिल्स उपचुनाव बीआरएस के लिए न सिर्फ एक राजनीतिक जीत होगी बल्कि जनता के विश्वास का प्रमाण भी बनेगा।


