बिहार चुनाव 2025: NDA ने किया सीट बंटवारे का ऐलान, BJP-JDU बराबर लड़ेंगी 101-101 सीटों पर
बिहार की सियासत में लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने आखिरकार अपने सीट बंटवारे के फार्मूले की घोषणा कर दी है। 2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर यह फैसला भाजपा, जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों के बीच कई दौर की बैठकों के बाद लिया गया। घोषणा के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) — दोनों ही दल 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, यानी गठबंधन में दोनों की बराबर हिस्सेदारी तय हुई है। इस बराबरी के फार्मूले से NDA ने यह संकेत दिया है कि वह किसी भी तरह का असंतुलन नहीं चाहता और दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के बीच एक समानता बनाए रखना चाहता है। इसके साथ ही, NDA के अन्य सहयोगियों में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति मंच (आरएलएम) को 6-6 सीटें दी गई हैं। इस घोषणा के बाद NDA कैंप में एकजुटता का संदेश गया है और यह माना जा रहा है कि अब पूरा गठबंधन पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा।
BJP और JDU के बीच 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद से कई बार मतभेद देखने को मिले थे, लेकिन 2025 के चुनाव से पहले यह बराबरी का सीट फॉर्मूला दोनों दलों के बीच संतुलन की राजनीति को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। इस बार BJP ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वह गठबंधन धर्म का पालन करते हुए जेडीयू को बराबरी का सम्मान दे रही है, ताकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व पर कोई सवाल न उठे। वहीं, JDU ने भी अपनी ओर से सहयोग का संकेत देते हुए यह स्पष्ट किया है कि वह NDA के साथ मिलकर एक मजबूत सरकार बनाने के लक्ष्य पर काम करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बराबरी का बंटवारा दोनों दलों को अपने-अपने समर्थक वर्गों में आत्मविश्वास देगा। BJP को उम्मीद है कि वह अपने पारंपरिक शहरी और युवा वोट बैंक को मजबूत करेगी, जबकि JDU ग्रामीण और पिछड़े वर्गों में अपनी पकड़ बनाए रखेगी। इस सीट बंटवारे से NDA ने यह भी दिखा दिया है कि वह 2020 की गलतियों को दोहराने के मूड में नहीं है और इस बार हर कदम पर रणनीतिक एकता बनाए रखना चाहता है।
NDA के इस नए फार्मूले में छोटे सहयोगी दलों को भी पर्याप्त सम्मान दिया गया है। चिराग पासवान, जो पहले NDA से नाराज़ होकर अलग रास्ते पर चले गए थे, अब लोजपा (रामविलास) के नाम से गठबंधन में शामिल हैं और उन्हें 29 सीटों का कोटा मिला है। यह संख्या न केवल पासवान की राजनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि BJP अब दलित वोट बैंक को किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहती। वहीं, जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘आरएलएम’ को 6-6 सीटें देकर NDA ने उन्हें भी साथ जोड़े रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फार्मूला इस बात का संकेत है कि NDA 2025 में “सामाजिक समीकरणों का संतुलन” बनाए रखते हुए सभी तबकों को प्रतिनिधित्व देना चाहता है। इस बंटवारे से यह भी स्पष्ट हो गया है कि केंद्र और राज्य नेतृत्व ने मिलकर एक ऐसा फार्मूला तैयार किया है जिसमें किसी भी दल को उपेक्षित महसूस न हो। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि यह एकजुटता जमीनी स्तर पर किस तरह काम करती है।
जहां NDA ने सीट बंटवारे का अध्याय शांतिपूर्वक पूरा कर लिया है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन में अभी भी सीटों को लेकर खींचतान और असहमति की स्थिति बनी हुई है। राजद (RJD) और कांग्रेस के बीच सीटों की संख्या को लेकर मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं। कुछ क्षेत्रीय दल भी अपने प्रभाव क्षेत्रों में अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, जिससे महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA की इस त्वरित घोषणा ने विपक्ष पर दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि अब उसे भी जल्द से जल्द अपनी रणनीति तय करनी होगी। NDA ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह “एकता और अनुशासन” के साथ मैदान में उतरेगा, जबकि महागठबंधन अभी भी “वर्चस्व की लड़ाई” में उलझा हुआ दिख रहा है। अगर विपक्ष अपने मतभेद सुलझाने में देर करता है, तो यह NDA को चुनावी लाभ दे सकता है। इस बीच, बिहार की जनता भी अब यह देखने को बेताब है कि किस गठबंधन का चेहरा, वादे और नेतृत्व राज्य की भविष्य दिशा तय करेंगे। 2025 का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और नेतृत्व की विश्वसनीयता की परीक्षा बनने जा रहा है।


