आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद: बरेली में प्रदर्शन, पथराव और लाठीचार्ज – राजनीति गरमाई
कानपुर से शुरू हुआ ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद अब धीरे-धीरे कई शहरों में फैलने लगा है और इसकी गूंज बरेली तक पहुँच गई। दरअसल, इस पहल का उद्देश्य शुरुआत में धार्मिक पहचान को लेकर भावनाएं प्रकट करना बताया गया था, लेकिन जैसे-जैसे यह अभियान फैला, इसका स्वरूप बदलता गया। इसके जवाब में हिंदू संगठनों ने ‘आई लव महाकाल’ और ‘आई लव महादेव’ जैसे पोस्टर लेकर मैदान में उतरना शुरू कर दिया। शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद बरेली में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर लेकर सैकड़ों की भीड़ इस्लामिया मैदान की ओर बढ़ी। पुलिस ने जैसे ही भीड़ को रोकने की कोशिश की, स्थिति अचानक बिगड़ गई। भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और पथराव की घटनाएँ सामने आईं। इसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और कानून-व्यवस्था के हालात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी। उपद्रव करने वालों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और आगे भी गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच, मौलाना तौकीर रज़ा का नाम भी विवादों में आ गया। पहले खबरें आईं कि उन्होंने प्रदर्शन रद्द कर दिया है, लेकिन बाद में उन्होंने इस सूचना को फर्जी बताया। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान वे खुद मौजूद नहीं थे। इसने भीड़ के नेतृत्व और उसके पीछे छिपे इरादों पर और सवाल खड़े कर दिए। प्रशासन के मुताबिक, यह पूरा प्रदर्शन पहले से तयशुदा नहीं था और अचानक बड़ा रूप ले बैठा। यही वजह है कि हालात को संभालने में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
राजनीतिक स्तर पर इस घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बरेली में हुए लाठीचार्ज को लेकर प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उनका कहना था कि सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल करके अपनी कमजोरी छिपाना चाहती है। अखिलेश ने यह भी कहा कि “सरकारें लाठीचार्ज से नहीं बल्कि सौहार्द और सद्भाव से चलती हैं।” उनका बयान सीधे तौर पर यूपी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता है। वहीं, विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई को कठोर बताया और इसे आम जनता की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। दूसरी ओर, बीजेपी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। बीजेपी का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को जो भी कदम उठाना पड़े, वह उठाएगी। इस तरह से मामला सिर्फ धार्मिक विवाद तक सीमित नहीं रहा बल्कि सीधा राजनीतिक जंग का रूप ले चुका है।
बीजेपी नेतृत्व ने अपने कार्यकर्ताओं को इस संवेदनशील मामले पर संयम बरतने की सख्त हिदायत दी है। पार्टी ने कहा है कि किसी भी प्रकार की अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। हालांकि, हिंदू संगठनों की ओर से ‘आई लव महाकाल’ और ‘आई लव महादेव’ जैसे पोस्टर लेकर मैदान में उतरना इस बात का संकेत है कि मामला केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह टकराव का रूप ले सकता है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी भी कीमत पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने न पाए। सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, आम जनता चाहती है कि ऐसे मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए और माहौल को गर्माने की जगह आपसी भाईचारे को बढ़ावा दिया जाए। स्पष्ट है कि यह विवाद केवल कानून-व्यवस्था की परीक्षा ही नहीं बल्कि राजनीतिक दलों और समाज की परिपक्वता की भी कसौटी बन गया है।


