बिहार चुनाव 2025: ‘वोट चोरी’ से ‘हाइड्रोजन बम’ तक बढ़ी बयानबाजी, NDA का पलटवार – नीतीश शासन में विकास बनाम बदलाव की बयार
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य की राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है। तमाम दलों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए हैं। विपक्ष द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ और ‘हाइड्रोजन बम’ जैसे आरोपों पर सत्तारूढ़ दलों ने तीखा पलटवार किया है। एनडीए नेताओं का कहना है कि विपक्ष को हार का डर सता रहा है, इसलिए वह चुनाव आयोग और प्रशासन की साख पर सवाल उठा रहा है। सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि बिहार के लोग अब जाग चुके हैं और ऐसे भ्रम फैलाने वाले बयान से जनता प्रभावित नहीं होगी। इस बीच, कई जगहों पर नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। मतदाता सूचियों को लेकर उठाए गए सवालों पर भी सत्तारूढ़ गठबंधन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मतदाता शुद्धिकरण अभियान पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि हर मतदाता का सही रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
विपक्ष की ओर से जहां ‘बदलाव की बयार’ का दावा किया जा रहा है, वहीं सत्ताधारी दल ने उसे झूठ का गुब्बारा बताया है। एनडीए नेताओं ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि ये दोनों “नेपोब आए खानदानिक नेता” हैं, जो विरासत में राजनीति पा गए हैं, लेकिन जनता के मुद्दों से कोसों दूर हैं। तेजस्वी यादव द्वारा किए गए नीतीश कुमार पर हमलों को भी खारिज करते हुए कहा गया कि नीतीश कुमार का शासनकाल विकास और स्थिरता का प्रतीक रहा है। उन्होंने प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। सरकार की ओर से आंकड़े भी पेश किए गए कि पिछले वर्षों में बिहार में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की संख्या कई गुना बढ़ी है, गांव-गांव तक सड़कें पहुंची हैं और 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, हर घर को 150 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना को गरीबों के लिए राहतकारी बताया गया।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए पिछली सरकारों की नाकामियों की याद दिलाई। नेताओं ने कहा कि जिस दौर में लालू यादव और राबड़ी देवी की सरकारें थीं, उस समय बिहार में “चरवाहा विद्यालय”, चोरी, डकैती, अपहरण और लूट जैसी घटनाएं आम बात थीं। सड़कों की हालत इतनी खराब थी कि लोग गांव से शहर तक पहुंचने में घंटों लगाते थे। एनडीए सरकार ने इन परिस्थितियों को पूरी तरह बदल दिया है। आज बिहार में जापान, अमेरिका और इंग्लैंड जैसी सड़कों और पुलों का निर्माण हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साझेदारी को विकास की रीढ़ बताया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि आज का बिहार अपराध से नहीं, उद्योग और शिक्षा से जाना जाता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और जो भी घोटाला करेगा वह “लालू जी की तरह जेल जाएगा।” यह बयान भाजपा के सख्त रुख को दर्शाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
मतदाता शुद्धिकरण अभियान को लेकर भी काफी राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है। विपक्ष का कहना है कि इस अभियान के जरिए मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ की जा रही है, लेकिन सत्ता पक्ष ने इसे देशव्यापी अभियान का हिस्सा बताते हुए उचित ठहराया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां घुसपैठियों के वोट बैंक बने हुए हैं, और उन्हें समाप्त करना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। इस बयान ने विपक्ष को नया मुद्दा दे दिया है, जिसने इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बताया। लेकिन सत्ता पक्ष का तर्क है कि यह कदम राष्ट्रहित और पारदर्शिता के लिए उठाया जा रहा है, न कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार के राजनीतिक माहौल को और भी गरम कर दिया है। चुनावी सभाओं में अब विकास, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और पहचान की राजनीति एक साथ गूंथती दिख रही है। सभी दलों के लिए यह चुनाव न सिर्फ सत्ता की जंग, बल्कि विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।


