शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अररिया जिले में चुनावी बिगुल बजाते हुए भाजपा की रणनीति को आगे बढ़ाया। अपनी जनसभा में उन्होंने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कई बड़े वादे किए और विकास के मुद्दों पर जोर दिया। अमित शाह ने कहा कि इस बार बिहार की जनता को “चार दीपावली” मनाने का अवसर मिलेगा, यानी चुनावी जीत के साथ-साथ त्योहार का भी जश्न मनाया जाएगा। उनके इस बयान ने न सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरा बल्कि विपक्षी पार्टियों के बीच भी हलचल मचा दी। अररिया में हुई इस जनसभा के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और भीड़ से भाजपा को यह संदेश मिला कि जनता का एक बड़ा वर्ग अब भी उनकी नीतियों में भरोसा रखता है। शाह ने इस दौरान विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि जो पार्टियां सिर्फ सत्ता की राजनीति करती हैं, उन्हें जनता हर बार नकारती है।
इस बीच, बिहार की अन्य राजनीतिक पार्टियों ने भी अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम करना तेज कर दिया है। राजद, जदयू, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। राजद लगातार बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं जदयू विकास के एजेंडे पर जनता के बीच जाकर नीतीश सरकार की उपलब्धियों को गिनाने का काम कर रहा है। कांग्रेस और वाम दल भी गठबंधन की संभावनाओं पर काम करते हुए जनता को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे मिलकर भाजपा और जदयू को कड़ी चुनौती देंगे। चुनावी रणनीति के तौर पर ये सभी दल युवाओं और महिलाओं पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही जातीय समीकरण भी बिहार के चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले हैं, और यही कारण है कि सभी पार्टियां अपने-अपने जातीय आधार को मजबूत करने की कवायद में जुटी हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। एक ओर भाजपा और जदयू गठबंधन अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों के दम पर जनता के बीच जा रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी दल बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष पर हमला कर रहे हैं। चुनावी रैलियों, रोड शो और जनसभाओं से माहौल गर्म हो चुका है और आने वाले दिनों में यह और भी रोचक होने वाला है। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग कब तारीखों का ऐलान करेगा और उसके बाद किस पार्टी की रणनीति जनता के दिल को भाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव न सिर्फ बिहार की राजनीति का भविष्य तय करेगा बल्कि 2029 के आम चुनावों के समीकरणों पर भी गहरा असर डालेगा। ऐसे में बिहार का चुनावी रण, नेताओं के वादे, जनता की उम्मीदें और जमीनी मुद्दे मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे हैं जिसे पूरे देश की निगाहें गौर से देख रही हैं।


