तमिलनाडु के करूर में विजय की रैली में भगदड़, 20 की मौत की आशंका
तमिलनाडु के करूर में अभिनेता और टीवीके (तमिऴगा वेत्ट्रि कड़गम) प्रमुख विजय की रैली में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। रैली में लाखों की संख्या में प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता पहुंचे थे, लेकिन भीड़ इतनी अधिक हो गई कि नियंत्रण बिगड़ गया और भगदड़ मच गई। इस घटना में शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 20 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया और लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए। पुलिस प्रशासन पहले से सतर्क था और भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, लेकिन अचानक उमड़ी भीड़ ने सभी व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया। यह घटना सिर्फ एक राजनीतिक रैली का हादसा नहीं बल्कि भीड़ प्रबंधन की गंभीर चूक का संकेत भी है। स्थानीय लोग और चश्मदीद गवाहों का कहना है कि लोग कई घंटों से धूप में खड़े थे और जैसे ही विजय मंच पर आए, हजारों लोग उन्हें नजदीक से देखने के लिए आगे बढ़ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
इस अफरातफरी के बीच पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया, लेकिन इससे हालात और बिगड़ गए। लोग इधर-उधर भागने लगे और भगदड़ में कई लोग कुचल गए। घायल लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि अस्पतालों में आपातकालीन वार्ड भर चुके हैं और डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री मा. सुब्रमण्यम और वरिष्ठ मंत्री सेंथिल बालाजी को तुरंत करूर भेजा है ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सके। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे का आश्वासन दिया है और घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की घोषणा की गई है। यह घटना तमिलनाडु की राजनीति और अभिनेता विजय की पार्टी दोनों के लिए गहरी चोट की तरह है, क्योंकि जिस रैली को शक्ति प्रदर्शन बनना था, वही एक त्रासदी में बदल गई।
इस बीच, पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने रैली से पहले ही विजय और उनकी पार्टी टीवीके को भीड़ नियंत्रण के विस्तृत निर्देश दिए थे। लेकिन, पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया, जिससे स्थिति हाथ से निकल गई। पुलिस का यह भी कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में भीड़ को मैनेज करना मुश्किल था, क्योंकि अनुमान से दोगुनी भीड़ उमड़ आई थी। विजय की लोकप्रियता और उनके फिल्मी करियर के कारण हजारों-लाखों प्रशंसक बिना किसी योजना के रैली में पहुंच गए। प्रशासन का मानना है कि इस घटना ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों की खामियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी इतनी बड़ी संख्या में लोग किसी कार्यक्रम में आते हैं, तो कई स्तर की सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी होना बेहद जरूरी है।
घटना के बाद अभिनेता विजय ने खुद मंच से अपील करते हुए भीड़ को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने लोगों से एम्बुलेंस और मेडिकल टीमों के लिए रास्ता खाली करने की अपील की। विजय ने कहा कि ऐसी स्थिति किसी ने नहीं चाही थी और वह व्यक्तिगत तौर पर हर पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। उनके इस संवेदनशील रवैये से कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों के बीच कुछ हद तक शांति बनी। लेकिन यह हादसा आने वाले समय में उनकी राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। विपक्षी दल पहले ही सरकार और प्रशासन को निशाने पर ले रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि आखिर रैली में सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों थी। वहीं, टीवीके पार्टी के भीतर भी इस बात की चर्चा है कि आगे की रैलियों में भीड़ नियंत्रण को लेकर और कड़े कदम उठाने होंगे। कुल मिलाकर करूर की यह त्रासदी सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि एक चेतावनी है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक आयोजनों में भीड़ सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


