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Shankhnaad: MP में Cough Syrup के कारण अब तक 14 बच्चों की मौत, एक्शन मोड में केंद्र सरकार |

मध्यप्रदेश में कफ सिरप से 14 बच्चों की मौत — डॉक्टर गिरफ्तार, कंपनी पर मुकदमा दर्ज

मध्यप्रदेश में बच्चों की मौत से जुड़ा यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला बन गया है। एक साधारण समझे जाने वाले कफ सिरप ने 14 मासूमों की जान ले ली, जिससे पूरे राज्य में दहशत और गुस्से का माहौल है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इन बच्चों को “होल्ट्रप सिरप” नाम की दवा दी गई थी, जिसे एक स्थानीय डॉक्टर ने प्रिस्क्राइब किया था। वही डॉक्टर अब गिरफ्तार हो चुके हैं और उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। छिंदवाड़ा जिले के अस्पतालों में कई बच्चों की हालत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद यह मामला सामने आया। परिजनों का आरोप है कि सिरप पीने के कुछ घंटों बाद ही बच्चों में उल्टी, बेहोशी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखे। डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि यह दवा बच्चों के किडनी फेलियर का कारण बनी। राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित बैच की दवा को बाजार से हटाने का आदेश दिया और फार्मास्युटिकल कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

इस घटना के बाद न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। केरल और तेलंगाना सरकारों ने भी “होल्ट्रप सिरप” की बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव स्तर की बैठक बुलाई, जिसमें राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए कि सभी दवा निर्माण कंपनियों की गुणवत्ता जांच तुरंत की जाए। दिलचस्प बात यह है कि जांच एजेंसियों की रिपोर्टों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है। जहां मध्यप्रदेश के ड्रग विभाग और सीडीएसयू (Central Drugs Standard Unit) की रिपोर्ट में सिरप के सैंपल “सुरक्षित” बताए गए, वहीं तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल एजेंसी ने इसमें मानक से कई गुना अधिक विषैले केमिकल्स पाए हैं। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। फिलहाल केंद्र ने एक मल्टी-पैनल कमेटी गठित की है, जो सभी राज्यों से सैंपल लेकर वैज्ञानिक परीक्षण कर रही है।

इसी बीच राजस्थान से भी एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। वहां की एक दवा कंपनी के मालिक लापता हो गए हैं, जिनकी बनाई दवा से भी बच्चों के बीमार होने की बात कही जा रही है। राजस्थान सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया और संबंधित कंपनी की 19 दवाइयों पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अब भी कई दवा कंपनियां बिना सख्त निगरानी के काम कर रही हैं, जिससे दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। यह घटना एक बार फिर उस बड़ी समस्या को उजागर करती है कि देश में ड्रग रेगुलेशन की व्यवस्था कितनी कमजोर है। फार्मा उद्योग में पारदर्शिता की कमी और बाजार में सस्ती दवाओं की मांग के कारण कंपनियां कभी-कभी गुणवत्ता से समझौता कर देती हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।

बच्चों की मौत का कारण बने इस सिरप में कौन-सा रसायन था और वह कितना खतरनाक था, यह बात धीरे-धीरे साफ हो रही है। एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि “इस सिरप में मौजूद केमिकल ने बच्चों की रीनल सेल्स को नष्ट कर दिया, जिससे रीनल टिब्युलर नेक्रोसिस की स्थिति उत्पन्न हुई और किडनी ने काम करना बंद कर दिया।” सरल शब्दों में कहें तो, यह रासायनिक पदार्थ इतना घातक था कि उसने बच्चों के शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने वाली प्रणाली को ही नष्ट कर दिया। यह घटना सिर्फ एक चिकित्सा त्रुटि नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है। मध्यप्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह राशि उन मासूम जिंदगियों की भरपाई कर सकती है? देश भर में लोग अब यह मांग कर रहे हैं कि दोषियों को कठोर सजा दी जाए और दवा उद्योग की निगरानी को सख्त किया जाए ताकि भविष्य में कोई परिवार ऐसी त्रासदी का सामना न करे।

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