सपनों की जंग: सफ़यान महमूद की कहानी, जिन्होंने पढ़ाई छोड़ क्रिकेट को बनाया करियर (oman)
परिवार की इच्छाओं के खिलाफ सफ़यान का फैसला: ओमान के क्रिकेटर सफ़यान मेहमूद आज एशिया कप खेलते हुए अपने सपनों को जी रहे हैं। 33 वर्षीय सफ़यान वर्तमान टीम में केवल एकमात्र ओमानी मूल के खिलाड़ी हैं। यह उनके लिए बहुत गर्व की बात है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। सफ़यान का परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई करे और एक कॉर्पोरेट करियर चुने। उनके पिता चाहते थे कि वह ब्रिटेन के मशहूर लफबरो यूनिवर्सिटी में जाकर बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन पढ़े। लेकिन सफ़यान ने क्रिकेट को चुना और पिता की इच्छा के खिलाफ़ जाकर यूनिवर्सिटी की एडमिशन ठुकरा दी। यही से उनकी असली जंग शुरू हुई।
उनके परिवार में सभी लोग पढ़ाई और प्रोफ़ेशन में आगे बढ़े। बड़े भाई दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट), छोटे भाई पेट्रोलियम इंजीनियर और बहन भी डेंटिस्ट हैं। पिता एक कंपनी में सेल्समैन से सीईओ तक बने। ऐसे माहौल में क्रिकेट चुनना बेहद मुश्किल था। घर में कभी किसी ने क्रिकेट को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन सफ़यान को लगता था कि ओमान जैसे देश में भी बच्चे इस खेल को अपनाएंगे और वह उसका हिस्सा बनना चाहते थे। यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि परिवार को मनाना सबसे बड़ी चुनौती थी।
शुरुआती क्रिकेट सफ़र और राष्ट्रीय टीम तक पहुँचना: सफ़यान का क्रिकेट सफर 2005-06 से शुरू हुआ, जब वह ओमान की अंडर-15 टीम में चुने गए। अपनी दूसरी ही अंतरराष्ट्रीय पारी में उन्होंने ईरान के खिलाफ़ प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीता। इसके बाद वह अंडर-17 टीम तक पहुँचे और फिर 2009 में राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली। उस समय ओमान में क्रिकेट का स्तर गहरा नहीं था, इसलिए दो-तीन अच्छे मैचों के बाद ही खिलाड़ी सीनियर टीम में आ सकते थे।
लेकिन उनके शुरुआती दिनों में अंतरराष्ट्रीय मैच बहुत कम होते थे। इसलिए राष्ट्रीय टीम में चयन होने का महत्व उतना नहीं दिखता था। बावजूद इसके सफ़यान ने हार नहीं मानी। उन्होंने पढ़ाई भी साथ में जारी रखी। पिता को मनाने के लिए उन्होंने ब्रिटेन के बजाय ओमान की एक यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया, जो यूके की यूनिवर्सिटी से संबद्ध थी। वहां उन्होंने पढ़ाई और क्रिकेट दोनों को संतुलित किया। क्लास मिस करने पर वह प्रोफेसरों से अनुमति लेकर बाद में कवर कर लेते थे। धीरे-धीरे शिक्षकों और साथियों का भी समर्थन मिलने लगा।
कॉर्पोरेट क्रिकेट और नौकरी की तलाश: ओमान में क्रिकेट का आधार मुख्य रूप से कॉर्पोरेट स्तर पर है। यहां की बड़ी कंपनियां अपनी-अपनी टीमें बनाती हैं और खिलाड़ियों को नौकरी भी देती हैं। सफ़यान के लिए यह दौर भी आसान नहीं रहा। शुरुआत में उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली, इसलिए इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करना पड़ा। वहां दिनभर काम करके वह रात में क्रिकेट खेलते।
कुछ समय बाद उन्हें “Enhance” नामक कंपनी से ऑफर मिला, जिसने उन्हें नौकरी भी दी और अपनी क्रिकेट टीम में शामिल भी किया। यहां उन्होंने लगभग पांच साल एचआर विभाग में काम किया। इसके बाद वह “Renaissance Services” कंपनी में चले गए, जहां उन्होंने क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की और लगातार दो साल में दो बड़े खिताब भी जिताए। इस तरह कॉर्पोरेट क्रिकेट ने उन्हें खेल और नौकरी दोनों में संतुलन बनाने का मौका दिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच और चोटों से जंग: 2015 में सफ़यान को पहला बड़ा मौका मिला जब वह उस ओमान टीम का हिस्सा बने जिसने 2016 टी20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था। 2021 में भी उन्होंने वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया। हालांकि 2022 में वह केवल रिज़र्व खिलाड़ी के रूप में टीम में थे। इसकी वजह थी उनका गंभीर घुटने की चोट (meniscus tear)।
ओमान के डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी कराने की सलाह दी, लेकिन सफ़यान मुंबई गए और मशहूर डॉक्टर दिनशॉ पारदीवाला से मिले, जिन्होंने ऋषभ पंत का इलाज भी किया था। उन्होंने सर्जरी से मना किया और केवल फिजियोथेरेपी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने को कहा। सफ़यान ने धैर्य से यह प्रक्रिया अपनाई और कुछ महीनों में पूरी तरह फिट हो गए। चोट से वापसी करना उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही।
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भारत के युवा खिलाड़ियों तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा से उनकी बातचीत ने भी उन्हें प्रेरित किया। वह मानते हैं कि बड़े खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करना और क्रिकेट पर विचार-विमर्श करना एक खिलाड़ी की सोच को निखार देता है। अब एशिया कप उनके लिए नया अध्याय है, और वह इसे अपने करियर का अहम पड़ाव मानते हैं।
परिवार का बदलता नज़रिया और सफ़यान की पहचान: शुरुआत में सफ़यान का परिवार उनके फैसले से खुश नहीं था। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने वर्ल्ड कप और एशिया कप जैसे बड़े टूर्नामेंट खेले, परिवार का रवैया बदल गया। अब उनके माता-पिता और भाई-बहन उनसे स्कोर और विकेट्स के बारे में पूछते हैं और गर्व महसूस करते हैं। एशिया कप के दौरान उनके परिवार के स्टेडियम में बैठकर मैच देखने की संभावना भी है।
सफ़यान के लिए क्रिकेट अब किसी को गलत साबित करने का जरिया नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने का साधन है। वह कहते हैं कि उन्होंने कभी सही कोचिंग या बड़े संसाधन नहीं पाए। उन्होंने क्रिकेट यूट्यूब देखकर सीखा। यही वजह है कि आज जब वह एशिया कप में ओमान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो उन्हें गर्व है कि उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद हार नहीं मानी। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर जुनून और धैर्य हो तो सपने पूरे किए जा सकते हैं।


