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Diwali पर घर वापसी की दर्दनाक तस्वीरें, Toilet में सफ़र को मजबूर यात्री, सरकार के दावे फेल?

दिवाली 2025: लखनऊ चारबाग स्टेशन पर ट्रेनों में भीड़, यात्रियों को झेलनी पड़ रही भारी परेशानियां

दिवाली का त्योहार आते ही देशभर में लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है, लेकिन इस साल लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए हालात अत्यंत चुनौतीपूर्ण बन गए हैं। आज तक के संवाददाता आशीष श्रीवास्तव की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन पर ट्रेनों की खचाखच भीड़ और टिकटों की गंभीर कमी ने सामान्य यात्री के लिए यात्रा करना लगभग असंभव बना दिया है। चारबाग स्टेशन पर जमा भीड़ और ट्रेनों के प्लेटफार्म पर सवार होने की घण्टों लंबी प्रतीक्षा ने यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यात्रियों के अनुसार, कुछ ट्रेनें तो समय से पहले आकर लोगों को अंदर नहीं आने देतीं, जिससे प्लेटफार्म पर उत्पन्न हुई भीड़ असहनीय हो गई है। इस स्थिति में यात्रियों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की थकावट का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि उन्हें लंबी कतारों में खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

यात्रियों ने अपनी पीड़ा खुलकर व्यक्त की है। कई लोग मुंबई और अन्य महानगरों से बिना सीट के खड़े होकर सफर कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग ट्रेन के शौचालय में बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं। एक यात्री ने बताया, “अंदर कितने लोग हैं? छह लोग… जगह नहीं मिली क्या? जगह नहीं मिली इसलिए तो बाथरूम में हैं।” यह बयान न केवल यात्रियों की कठिनाई को उजागर करता है, बल्कि यह रेलवे प्रशासन के द्वारा लागू किए गए विशेष उपायों की भी विफलता को दिखाता है। हालांकि रेलवे प्रशासन और राज्य सरकार ने दिवाली के अवसर पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाने और अतिरिक्त टिकट व्यवस्था करने का दावा किया था, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। यात्रियों को घंटों प्लेटफार्म पर खड़ा रहकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है और जब ट्रेन आती है, तो उसमें बैठने की जगह भी नहीं होती।

हवाई यात्रा का विकल्प भी आम आदमी के लिए मुश्किल बन चुका है। दिवाली के समय हवाई किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिससे कम और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए उड़ान विकल्प असंभव सा लग रहा है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन और हवाई यात्रा दोनों विकल्प कठिन हो चुके हैं, जिससे लोगों को घर लौटने में अत्यधिक परेशानी हो रही है। इस बीच, रेलवे स्टेशन और प्लेटफार्म पर लोगों की भीड़ से सुरक्षा व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा कर्मी होने के बावजूद भीड़ पर नियंत्रण करना मुश्किल साबित हो रहा है। इसके अलावा, प्लेटफार्म पर खाने-पीने की व्यवस्था और शौचालय की साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं में भी भारी कमी दिखाई दे रही है।

यह स्थिति केवल यात्रियों की असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रेलवे की छवि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर सरकार और रेलवे प्रशासन दिवाली के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनें और ऑनलाइन टिकटिंग का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्लेटफार्म पर यात्रियों की वास्तविक स्थिति इसके विपरीत दिखाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के समय इस तरह की भीड़ और असुविधा हर साल सामने आती है, लेकिन इस बार यह विशेष रूप से गंभीर बन गई है। यात्रियों की थकान, असुरक्षा और सीमित संसाधनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रेलवे प्रशासन को न केवल अतिरिक्त ट्रेनें चलाने, बल्कि बेहतर भीड़ प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और सुरक्षा उपायों को मजबूती से लागू करने की आवश्यकता है।

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